कविता - पिता की वर्णमाला - विनीता परमार

विनीता परमार - जन्म जन्म स्थान : छौड़ादानो (पूर्वी चंपारण) शिक्षा : पीएचडी (पर्यावरण विज्ञान), M.Ed. व्यवसाय पद : केन्द्रीय विद्यालय पतरातू (झारखंड) में शिक्षिका के पद पर कार्यरत रूचि : कविता, आलेख, लेख, निबंध, कहानी लेखन, जीवनमूल्य परक साहित्य, अध्ययन व लेखन। 'दूब से मरहम' कविता संग्रह, खनक आखर की संयुक्त कविता संग्रह


 


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पिता की वर्णमाला


 


पवर्ग में ही होते हैं दोनों


मेरे ख्वाब, मेरे मनुहार 'म' में


तभी मेरी जिद 'प' में।


अपने से बेहतर


दूर तक ले जाने में 'म' की


कई कामनाओं का विसर्जन पाया


अपनी थाली से अनिच्छा बताकर


कुछ हिस्सा 'प' का मेरे लिए छोड़ते पाया


आकाश सा विस्तार तो


अग्नि की धधक में जहरों को पीते


प्राणवायु में 'प' को हरदम ही पाया 1


जल सी बहती निर्मल धार


पृथ्वी आकाश के मिलन में 'म' को हंसते पाया


पंच तत्वों से बने शरीर में


मां की ध्वनि में


हरदम पिता के 'प' को


एक मौन अक्षर ही पाया।


                                                                                           सम्पर्क : केंद्रीय विद्यालय रामगढ़ कैंट, झारखंड, मो.नं. : 7633817152